यरूशलम
कई बार एक ही उम्र के दो व्यक्तियों में काफी फर्क नजर आता है। कोई छोटी उम्र में ही बूढ़ा दिखने लगता है, तो कोई बड़ी उम्र में भी जवान बना रहता है। एक नए अध्ययन में पाया गया है कि कुछ युवाओं की उम्र सामान्य से तीन गुना रफ्तार से बढ़ रही है, जबकि ऐसा लगता है कि अन्य लोगों में लंबी अवधि की युवावस्था का रहस्य छिपा है।

अमेरिका, ब्रिटेन, इस्राइल और न्यू जीलैंड के एक अंतरराष्ट्रीय शोध दल ने युवा वयस्कों में उम्र बढ़ने की प्रक्रिया मापने का तरीका खोजा।
अध्ययन में 26 से 38 वर्ष के प्रतिभागियों के साथ काम करते हुए वैज्ञानिकों ने उन कारकों की पहचान की जिससे यह पता लगाया जा सकता है कि लोगों की अपने हमउम्रों की तुलना में उम्र तेजी से बढ़ रही है या धीमे।
शोधकर्ताओं ने पाया कि युवा वयस्कों में भी एक व्यक्ति की जैविक उम्र में उनकी वास्तविक कालानुक्रमिक उम्र से कई वर्ष का अंतर हो सकता है।
उदाहरण के लिए, 38 साल के लोगों के अध्ययन में प्रतिभागियों की जैविक उम्र 30 वर्ष से लेकर करीब 60 वर्ष तक की पाई गई। इसका मतलब यह हुआ कि कुछ प्रतिभागियों की जैविक उम्र उनके जन्म प्रमाणपत्रों से भी 20 साल अधिक है।
यरूशलम हेब्रेव विश्वविद्यालय के मनोवैज्ञानिक विभाग के डॉक्टर सेलोमन इस्राइल ने कहा कि यह अध्ययन दिखाता है कि युवा वयस्कों में उम्र संबंधी उतार होने लगा है, जो उम्र संबंधी बीमारियां विकसित होने से दशकों दूर हैं और हम इसे माप सकते हैं।
यह अध्ययन वर्ष 1972-73 में जन्मे एक हजार से अधिक लोगों पर ब्लड प्रेशर, यकृत और शरीर के अन्य महत्वपूर्ण अंगों के संचालन एवं स्वास्थ्य मानकों तथा साक्षात्कारों की मदद से किया गया।
वर्ष 2011 में संबंधित लोगों के नियमित आकलन के तहत दल ने गुर्दे, यकृत, फेफड़ों, मेटाबॉलिक एवं प्रतिरोधक प्रणालियों के संचालन पर गौर किया।
कई बार एक ही उम्र के दो व्यक्तियों में काफी फर्क नजर आता है। कोई छोटी उम्र में ही बूढ़ा दिखने लगता है, तो कोई बड़ी उम्र में भी जवान बना रहता है। एक नए अध्ययन में पाया गया है कि कुछ युवाओं की उम्र सामान्य से तीन गुना रफ्तार से बढ़ रही है, जबकि ऐसा लगता है कि अन्य लोगों में लंबी अवधि की युवावस्था का रहस्य छिपा है।

अमेरिका, ब्रिटेन, इस्राइल और न्यू जीलैंड के एक अंतरराष्ट्रीय शोध दल ने युवा वयस्कों में उम्र बढ़ने की प्रक्रिया मापने का तरीका खोजा।
अध्ययन में 26 से 38 वर्ष के प्रतिभागियों के साथ काम करते हुए वैज्ञानिकों ने उन कारकों की पहचान की जिससे यह पता लगाया जा सकता है कि लोगों की अपने हमउम्रों की तुलना में उम्र तेजी से बढ़ रही है या धीमे।
शोधकर्ताओं ने पाया कि युवा वयस्कों में भी एक व्यक्ति की जैविक उम्र में उनकी वास्तविक कालानुक्रमिक उम्र से कई वर्ष का अंतर हो सकता है।
उदाहरण के लिए, 38 साल के लोगों के अध्ययन में प्रतिभागियों की जैविक उम्र 30 वर्ष से लेकर करीब 60 वर्ष तक की पाई गई। इसका मतलब यह हुआ कि कुछ प्रतिभागियों की जैविक उम्र उनके जन्म प्रमाणपत्रों से भी 20 साल अधिक है।
यरूशलम हेब्रेव विश्वविद्यालय के मनोवैज्ञानिक विभाग के डॉक्टर सेलोमन इस्राइल ने कहा कि यह अध्ययन दिखाता है कि युवा वयस्कों में उम्र संबंधी उतार होने लगा है, जो उम्र संबंधी बीमारियां विकसित होने से दशकों दूर हैं और हम इसे माप सकते हैं।
यह अध्ययन वर्ष 1972-73 में जन्मे एक हजार से अधिक लोगों पर ब्लड प्रेशर, यकृत और शरीर के अन्य महत्वपूर्ण अंगों के संचालन एवं स्वास्थ्य मानकों तथा साक्षात्कारों की मदद से किया गया।
वर्ष 2011 में संबंधित लोगों के नियमित आकलन के तहत दल ने गुर्दे, यकृत, फेफड़ों, मेटाबॉलिक एवं प्रतिरोधक प्रणालियों के संचालन पर गौर किया।
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