Saturday, 11 July 2015

नौ साल बाद बच्‍चे ने खाया खाना, जानिए क्‍यों


रोहतक । गर्भ से ही गंभीर बीमारी से ग्रसित एक बच्ची को नौ साल तक अन्न से वंचित रहना पड़ा। आहार नली पूरी नहीं होने के कारण वह खाना नहीं खा सकती थी। लेकिन अब वह खाना खा सकती है और मुंह दूध भी पी रही है। पीजीआइएमएस के चिकित्सकों ने आपरेशन कर बच्ची को नई जिंदगी दे दी है।
चिकित्सकों ने गैस्टिक प्लास्टो ऑपरेशन के माध्यम से खाने की पूर्ण नली तैयार कर दी है। महम निवासी पप्पू की पत्नी ने करीब नौ साल पहले एक बच्ची को जन्म दिया। बच्ची जो कुछ भी पीती थी वह मुंह से बाहर निकल जाता था। इसके बाद जांच से पता चला कि उसकी आहार नली ही नहीं है।
दो बड़े ऑपरेशन कर गले और पेट में नली लगाई गई। वह बच्ची जब भी मुंह से भूल बस कुछ खा लेती या थूक आदि एकत्रित हो जाते थे वह गले वाली नली से निकल जाता था। वही जब उसको भूख लगती थी तो उसको पेट वाली नली के माध्यम से दूध या पानी पिलाया जाने लगा।
इसके बाद चिकित्सकों ने सलाह दी कि जब बच्ची का वजन 10 किलो से वजह हो जाएगा तो प्रमुख ऑपरेशन किया जाएगा। हालांकि जागरूकता की कमी के कारण उसकी अच्छी तरह से देखभाल नहीं हो सकी, जिसके कारण उसका वजन देरी से बढ़ा।
पिछले दिनों पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्व विद्यालय, पीजीआइएमएस बच्च रोग शल्य चिकित्सा के हेड डॉ. केएन रतन, डॉ. पी गोदारा व डॉ. प्रशांत ने गैस्टिक प्लास्टो नामक ऑपरेशन किया। अब उस बच्ची की आहार नली बना दी गई है। बच्ची की आहार नली पूर्ण नहीं थी, जिसके कारण वह मुंह से खाना नहीं खा पाती थी। इसके लिए जन्म के कुछ दिन बाद ही गले और पेट में बाह्य नली लगा दी गई।
इसी के रास्ता उसको दूध दिया जाता रहा। अब गैस्टिक प्लास्टो ऑपरेशन के माध्यम से मुंह से लेकर मैदा तक आहार नली लगा दी गई है। इस समस्या को इसोफेजियल एट्रेसिया टाइप वन कहा जाता है। वैसे यह समस्या बदल रही दिनचर्या, खानपान आदि से उत्पन्न हो रही है। इसके साथ ही गर्भावस्था में गलत गोलियों का सेवन एवं बार-बार एक्स-रे भी प्रमुख कारण बन रहे रहे हैं। वैसे बच्ची अब ठीक है।
डॉ. केएन रतन, पीडिएक्ट्रिक सर्जरी के हेड एवं प्रभारी एमएस, पीजीआइएमएस।

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